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मंदसौर-नीमच में अफीम की खेती से कितनी कमाई? जानिए लाइसेंस और नियम

📍 सामाजिक |📍 छत्तीसगढ़ प्रदेश | mar/11/2026| ✍️ Prashant Kumar Narware
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Opium cultivation in Mandsaur and Neemuch of Madhya Pradesh is strictly regulated by the Central Bureau of Narcotics. Learn about licensing, farming process, rules and farmer income.

मंदसौर/नीमच। मध्यप्रदेश का मालवा क्षेत्र लंबे समय से अफीम की खेती के लिए देशभर में प्रसिद्ध रहा है। खासकर मंदसौर और नीमच जिलों में किसान सरकार से लाइसेंस लेकर इस विशेष फसल की खेती करते हैं। यह खेती पूरी तरह नियंत्रित व्यवस्था के तहत होती है और इसकी निगरानी Central Bureau of Narcotics (CBN) द्वारा की जाती है।

भारत में अफीम की खेती पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में
भारत में अफीम (Opium Poppy) की खेती पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में होती है। बिना लाइसेंस अफीम की खेती करना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा हो सकती है। मध्यप्रदेश के इंदौर क्षेत्र यानी मालवा क्षेत्र में भी अफीम की खेती केवल सरकार से अनुमति मिलने पर ही की जाती है।



1️⃣ लाइसेंस किससे मिलता है
अफीम की खेती का लाइसेंस भारत सरकार के Central Bureau of Narcotics (CBN) द्वारा दिया जाता है। इसका मुख्य कार्यालय ग्वालियर में स्थित है। किसानों को हर साल इस विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

2️⃣ किन राज्यों में अनुमति मिलती है
भारत में मुख्य रूप से अफीम की खेती तीन राज्यों में लाइसेंस के साथ की जाती है:

• मध्यप्रदेश
• राजस्थान
• उत्तर प्रदेश

मध्यप्रदेश में खासकर मालवा क्षेत्र के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों में यह खेती अधिक होती है।

3️⃣ लाइसेंस पाने की प्रक्रिया
अफीम की खेती के लिए किसान को कई औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

• किसान को हर साल CBN कार्यालय में आवेदन करना होता है।
• जमीन के दस्तावेज जैसे खसरा और खतौनी जमा करने पड़ते हैं।
• सरकार द्वारा तय Minimum Qualifying Yield पूरा करना जरूरी होता है।
• खेत का निरीक्षण CBN अधिकारी करते हैं।
• अनुमति मिलने के बाद ही किसान अफीम की खेती शुरू कर सकता है।

4️⃣ खेती कैसे की जाती है
अफीम की खेती एक विशेष तकनीक से की जाती है।

• बुवाई का समय: अक्टूबर–नवंबर
• फलियों पर चीरा: फरवरी–मार्च में लगाया जाता है
• निकलने वाला दूध जैसा पदार्थ सूखकर कच्ची अफीम बनता है
• पूरी उपज सरकार को जमा करानी पड़ती है

कितनी होती है कमाई
विशेषज्ञों के अनुसार मालवा क्षेत्र में अफीम की खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होती है। सामान्य तौर पर एक एकड़ में किसान लगभग 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक सालाना कमा सकते हैं।

सरकार किसानों से अफीम की खरीद निर्धारित दरों पर करती है, जो सामान्यतः 1200 से 1800 रुपये प्रति किलो तक होती है। कुछ मामलों में गुणवत्ता बेहतर होने पर कीमत 2000 से 2400 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच सकती है।

उत्पादन का लक्ष्य भी तय
सरकार किसानों के लिए न्यूनतम उत्पादन (Minimum Qualifying Yield) भी तय करती है। उदाहरण के तौर पर एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 58 किलो या उससे अधिक उत्पादन का लक्ष्य रखा जाता है। यदि किसान यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता तो उसका लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण नियम
अफीम की खेती में नियम बेहद सख्त होते हैं:

• किसान अपनी अफीम खुद बेच नहीं सकता।
• पूरी उपज सरकार को ही देनी होती है।
• अवैध भंडारण या बिक्री पर NDPS Act के तहत कार्रवाई होती है।



FAQs

Q: भारत में अफीम की खेती कौन नियंत्रित करता है?
Ans: भारत सरकार का सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN)।

Q: भारत में किन राज्यों में अफीम की खेती की अनुमति है?
Ans: मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लाइसेंस के साथ।

Q: अफीम की खेती से किसान कितना कमा सकते हैं?
Ans: सामान्यतः 1.5 से 3 लाख रुपये प्रति एकड़ तक सालाना।

Q: क्या किसान अफीम खुद बाजार में बेच सकते हैं?
Ans: नहीं, पूरी उपज सरकार को ही देना अनिवार्य है।

Q: अफीम की खेती बिना लाइसेंस करने पर क्या होता है?
Ans: NDPS Act के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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