छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने केवल 4 मिलीलीटर (ML) कंट्रास्ट डाई का उपयोग करते हुए एक महिला मरीज की सफल आईवीयूएस (IVUS) गाइडेड अल्ट्रा-लो कंट्रास्ट एंजियोप्लास्टी कर चिकित्सा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह तकनीक विशेष रूप से किडनी रोग से ग्रस्त मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जा रही है।
सामान्य प्रक्रिया से कई गुना कम कंट्रास्ट डाई
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने मरीज की राइट कोरोनरी आर्टरी (RCA) की सफल एंजियोप्लास्टी की। सामान्य एंजियोप्लास्टी में जहां लगभग 80 से 150 एमएल कंट्रास्ट डाई की आवश्यकता होती है, वहीं इस जटिल प्रक्रिया को केवल 4 एमएल कंट्रास्ट डाई के उपयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
IVUS तकनीक से मिली सटीकता और सुरक्षा
इस प्रक्रिया में इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) तकनीक का उपयोग किया गया। इस आधुनिक तकनीक में रक्त वाहिका के भीतर विशेष अल्ट्रासाउंड कैथेटर के माध्यम से धमनी की आंतरिक संरचना, ब्लॉकेज की गंभीरता तथा स्टेंट के आकार और उसकी सटीक स्थिति का वास्तविक समय में आकलन किया जाता है। इससे अत्यंत कम कंट्रास्ट डाई के उपयोग के बावजूद स्टेंट को पूरी सटीकता और सुरक्षा के साथ प्रत्यारोपित किया जा सका।
किडनी मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प
डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि सामान्य एंजियोप्लास्टी में उपयोग होने वाली आयोडीन युक्त कंट्रास्ट डाई से कॉन्ट्रास्ट-इंड्यूस्ड एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा रहता है, विशेषकर उन मरीजों में जिनकी किडनी पहले से प्रभावित होती है। ऐसे मरीजों के लिए IVUS गाइडेड अल्ट्रा-लो कंट्रास्ट या जीरो-कंट्रास्ट एंजियोप्लास्टी अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। केवल 4 एमएल कंट्रास्ट डाई के साथ पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक करना आधुनिक चिकित्सा तकनीक की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की संयुक्त निगरानी में हुआ उपचार
महिला मरीज को अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी थीं, इसलिए उपचार से पहले किडनी रोग विशेषज्ञों की सलाह भी ली गई। प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर और संतोषजनक बताई गई है। चिकित्सकों के अनुसार मरीज तेजी से स्वस्थ हो रही है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
प्रदेश में उन्नत हृदय उपचार की नई पहचान
चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि आधुनिक IVUS इमेजिंग तकनीक के माध्यम से जटिल हृदय रोगों का उपचार अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। वहीं अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट प्रदेश में उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है और यहां उच्च जोखिम वाले मरीजों को भी सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रशासनिक
रायपुर में नई उपलब्धि: केवल 4 एमएल कंट्रास्ट डाई से सफल एंजियोप्लास्टी, किडनी मरीजों के लिए सुरक्षित तकनीक
Advanced Cardiac Institute, Raipur successfully performed an IVUS-guided ultra-low contrast angioplasty using only 4 ml contrast dye, offering a safer treatment option for high-risk kidney patients.
FAQs
Q: Q: यह सफल एंजियोप्लास्टी कहां की गई?
Ans: A: रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट में।
Ans: A: रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट में।
Q: Q: इस प्रक्रिया में कितनी कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया गया?
Ans: A: केवल 4 एमएल कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया गया।
Ans: A: केवल 4 एमएल कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया गया।
Q: Q: सामान्य एंजियोप्लास्टी में कितनी कंट्रास्ट डाई लगती है?
Ans: A: सामान्यतः 80 से 150 एमएल कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है।
Ans: A: सामान्यतः 80 से 150 एमएल कंट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है।
Q: Q: IVUS तकनीक का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
Ans: A: यह कम या बिना कंट्रास्ट डाई के अधिक सटीक और सुरक्षित एंजियोप्लास्टी करने में मदद करती है।
Ans: A: यह कम या बिना कंट्रास्ट डाई के अधिक सटीक और सुरक्षित एंजियोप्लास्टी करने में मदद करती है।
Q: Q: यह तकनीक किन मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है?
Ans: A: किडनी रोग या किडनी क्षति के उच्च जोखिम वाले हृदय मरीजों के लिए।
Ans: A: किडनी रोग या किडनी क्षति के उच्च जोखिम वाले हृदय मरीजों के लिए।
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